शिक्षा की प्रयोगशाला- मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के नए आदेश के अनुसार अब बच्चों का घर ही उनका स्कूल बन गया है। और इनका जिम्मा मुख्य तौर पर उनके माता-पिता तथा घर वालों को दिया गया है ।स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार अब घर के एक कक्ष को स्कूल के अनुसार वातावरण देने के लिए पालक थालिया या घंटी बजाकर नियत समय पर अपने बच्चों को पढ़ाने बैठाएँगे ,लेकिन जिस ज्वलंत प्रश्न का उत्तर हर कोई देने से बच रहा है वह यह है कि अगर पालक बच्चों की पढ़ाई के लिए दिन भर घर पर रहेंगे तो फिर काम कौन करेगा ?ग्रामीण अंचलों में देखा गया है कि माता पिता सुबह से ही मजदूरी और खेती के काम में लग जाते हैं ,ऐसी स्थिति में बच्चों को पढ़ाने बिठाना यह चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। कुछ रिपोर्ट के अनुसार जब शिक्षक घर-घर जाकर फीडबैक ले रहे थे तो उन्होंने बताया कि शहरों में तो फिर भी घर पर कोई मिल जाता है ,लेकिन ग्रामीण अंचलों के घरों में लोग ताले लगाकर खेती करने या मजदूरी करने अपने बच्चों को साथ लेकर निकल जाते हैं। और अगर बच्चे हैं भी , तो वह आस-पड़ोस में खेल...
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