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कर्मचारी बेचारा NPS का मारा

पेंशन की टेंशन!! अगर आप सोचते है कि सरकारी नौकरी में भविष्य सुरक्षित है तो आपको अपनी सोच बदलनी होगी। क्योंकि जिस जॉब सेक्युरिटी की वजह से सरकारी नौकरी का आकर्षण बना हुआ था उसे 2004 से बंद कर दिया गया है! जी हाँ  पेंशन   जिसे बुढ़ापे का सहारा समझा जाता था अब वो गुजरे वक़्त की बात हो चुुकी है।   और ये पेंशन सिर्फ कर्मचारियों की ही नही वरन 2004 के बाद भर्ती हुए सभी अधिकारियों की भी बंद हो गई है सिर्फ नेताओ को छोड़ कर। जी हाँ! फिर से सही सुना आपने।  नेताजी आज भी अपनी पेंशन सिर्फ एक दिन के कार्यकाल से लेकर 5 साल के अपने लंबे चोड़े कार्यकाल तक को पूरा करने पर पेंशन के हकदार हैं। आखिर क्यों बन्द की गई थी पेंशन? आधिकारिक तौर पर तो सरकार द्वारा यही बताया गया है कि कर्मचारियों की तनख्वाह और पेंशन पर सबसे ज्यादा खर्च होने के कारण इसे बंद किया जाना जरूरी था। इसकी जगह NPS जिसे नेशनल पेंशन स्कीम कहाँ जाता है ,की शुरुआत की गई। 2004 में नवनिर्वाचित सरकार ने इस बिल को पास करके लागू करदिया।  शुरुवात में किसी को भी इस स्कीम के बारे में ज्यादा कुछ पता नही था इसलिए इसका वैसा व...

मध्यप्रदेश - वार्षिक वेतनवृद्धि पर रोक!

कर्मचारियों और अधिकारियों की वेतनवृद्धि पर रोक  मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश के कर्मचारियों और अधिकारियों के डीए और एरियर्स पर लगी रोक यथावत जारी है। लेकिन इसी बीच अब खबर आ रही है कि वित्त विभाग ने इस वर्ष लगने वाली वार्षिक वेतन वृद्धि पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया है । इस संबंध में मसूदा बनाकर मुख्यमंत्री के अनुमोदन के लिए फाइल आज शाम तक भेजे जाने की संभावना है । अगर मुख्यमंत्री इसके ऊपर अपनी सहमति दे देते हैं तो प्रदेश के लगभग साढे सात लाख कर्मचारियों और अधिकारियों को मिलने वाला वार्षिक वेतन वृद्धि का बढ़ा हुआ वेतन इस माह नहीं मिल पाएगा। ज्ञात रहे कि वित्त विभाग ने इससे पहले पोर्टल की खराबी को और सॉफ्टवेयर अपडेटिंग को कारण बताते हुए वार्षिक वेतन वृद्धि नहीं दिए जाने के बारे में जानकारी दी थी लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि आईएफएमएस पोर्टल पर वार्षिक वेतन वृद्धि का ऑप्शन डिसएबल कर यह प्रक्रिया पहले से ही विभागीय स्तर पर चल रही थी। मध्य प्रदेश के कर्मचारी और अधिकारी जो पहले ही डीए तथा अपने एरियर से वंचित है उन पर एक और मार वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने पर पड़ी है । कर्मचारी सं...

घर घर शिक्षक- शिक्षा के साथ नित् नए प्रयोग।

 शिक्षा की प्रयोगशाला-  मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के नए आदेश के अनुसार अब बच्चों का घर ही उनका स्कूल बन गया है। और इनका जिम्मा मुख्य तौर पर उनके माता-पिता तथा घर वालों को दिया गया है ।स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार अब घर के एक कक्ष को स्कूल के अनुसार वातावरण देने के लिए पालक  थालिया या घंटी बजाकर नियत समय पर अपने बच्चों को पढ़ाने  बैठाएँगे ,लेकिन जिस ज्वलंत प्रश्न का उत्तर हर कोई देने से बच रहा है  वह यह है कि अगर पालक बच्चों की पढ़ाई के लिए दिन भर घर पर रहेंगे तो फिर काम कौन करेगा ?ग्रामीण अंचलों में देखा गया है कि माता पिता सुबह से ही मजदूरी और खेती के काम में लग जाते हैं ,ऐसी स्थिति में बच्चों को पढ़ाने बिठाना यह चुनौतीपूर्ण कार्य होगा।  कुछ रिपोर्ट के अनुसार जब शिक्षक घर-घर जाकर फीडबैक ले रहे थे तो उन्होंने बताया कि शहरों में तो फिर भी घर पर कोई मिल जाता है ,लेकिन ग्रामीण अंचलों के घरों में लोग ताले लगाकर खेती करने या मजदूरी करने अपने बच्चों को साथ लेकर निकल जाते हैं। और अगर बच्चे हैं भी , तो वह आस-पड़ोस में खेल...

मध्यप्रदेश- स्कूल रहेंगे बन्द लेकिन इन्हें करना होगा काम।

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने घोषित की 31 जुलाई तक छुट्टियां  मध्य प्रदेश । संवाददाता । मध्य प्रदेश सरकार कोरोना वायरस के बढ़ते जोखिम के मद्देनजर अभी बिल्कुल भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है । लोक शिक्षण संचनालय ने कल जारी आदेश में, स्कूल शिक्षा विभाग की 30 जून तक के अवकाश को आगे बढ़ाते हुए 31 जुलाई तक करने का निर्णय किया  है । विभाग ने इसके साथ ही साफ कर दिया है कि सिर्फ स्कूल बंद रहेंगे लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई और अन्य गतिविधियां  जस की तस चलती रहेगी ।  आदेश आने के पश्चात शिक्षकों में गफलत की स्थिति निर्मित हो गई थी। वह समझ नहीं पा रहे थे कि क्या उन्हें स्कूल जाना है या नहीं। लेकिन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शिक्षकों को अभी नियमित स्कूल का संचालन तो नहीं करना है, लेकिन घर घर जाकर पुस्तक वितरण का कार्य तथा डीजी लेप  द्वारा संचालित कक्षाएं तथा उनका संचालन पूर्व की भांति ही करना होगा ।  6 जुलाई से शुरू होगी हलचल। दिनांक 6 जुलाई 2020 से पुस्तक वितरण करने के पश्चात उसकी पावती लेना , प्रतिदिन 5 विद्यार्थियों के घर जाकर "मेरा घर मेरा विद्यालय" का फॉलोअप लेना ...

अतिथियों की भर्ती प्रक्रिया

                       62000 पदों पर होगी नियमित शिक्षकों की भर्ती  मप्र के शिक्षा मंत्री ने आज बताया की सितम्बर में रिक्त पड़े 62000 शिक्षकों के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जायगी।  इसके लिए प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड को तयारी के निर्देश दे दिए गए है।  हालांकि इन पदों पर नियुक्ति चुनाव के बाद ही होगी। इसके साथ ही अतिथि शिक्षकों के लिए 18000 पदों को आरक्षित किया गया है. इन पदों पर ३ वर्ष या २०० दिन अतिथि शिक्षक के रूप में सेवा देने वाले अभ्यर्थियों को रखा जायगा।  सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मप्र शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दे दिए हैं। इससे पहले यह मप्र संविदा शिक्षक भर्ती के नाम से पुकारी जाती थी। सीएम शिवराज सिंह ने ऐलान किया था कि अब मप्र में कोई संविदा भर्ती नहीं होगी अत: आगामी भर्ति को नियमित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया कहा जा रहा है। सीएम शिवराज सिंह ने यह आदेश आज मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में दिए। अभी यह तय नहीं हुआ है कि भर्ती प्रोफेशनल एग्जामिनेश...