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मध्यप्रदेश अतिथि शिक्षकों की वेतन में हुई बढ़ोत्तरी। जाने कितना ओर कब से मिलेगा वेतन?

 मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षकों के वेतन में हुई शानदार बढ़ोत्तरी।  मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षकों के लिए खुशखबरी आयी है। पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की घोषणा के बाद अतिथि शिक्षकों का वेतन डबल कर दिया गया था। लेकिन आचार संहिता लगने के कारण इस आदेश को अमली जामा नही पहनाया जा सका लेकिन अब खबर यह है कि मध्यप्रदेश के समस्त अतिथि शिक्षकों को माह ऑक्टोम्बर से दुगना वेतन मिलना शुरू हो गया है।  मध्यप्रदेश सरकार ने प्राथमिक शिक्षकों को 10000, माध्यमिक शिक्षक को 14000 और उच्च माध्यमिक शिक्षक का वेतन 18000 रु कर दिया था। अतिथि शिक्षक अपनी id से स्वयं अपने वेतन की जानकारी mpeducation portal से प्राप्त कर सकते है।  लेकिन यह व्यवस्था अभी पूरे मध्यप्रदेश में नही लागू हुई है, विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि सभी अतिथि शिक्षकों का डेटा पोर्टल पर अपलोड नही हो पाया है, सभी डेटा एकत्र करने के बाद सभी शिक्षकों की सम्पूर्ण जानकारी अब ऑनलाइन ही मिल जायेगी। 

स्कूलों में अवकाश!! लेकिन ये काम रहेंगे चालू

स्कूलों में अवकाश घोषित। जैसा कि सभी को लग रहा था गुरुवार को वही हुआ। मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र की गाईड लाइन को मानते हुवे अनलॉक 3 में स्कूलों में 30 अगस्त तक अवकाश घोषित कर दिया है। इस संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए जा चुके है। स्कूल बंद रहने के कारण बच्चों में पढ़ाई का नुकसान न हो इसके लिए ऑनलाइन गतिविधियों पर कोई रोक नही लगाई गई है। इसी के साथ "हमारा घर हमारा विद्यालय" अभियान भी जारी रहेगा ये भी तय हो गया है। शिक्षकों की उपस्थिति भी तय। इसीके साथ विभाग ने एक अन्य आदेश भी निकाल दिया है, जिसमे स्प्ष्ट किया गया है कि स्कूलों में इस दौरान सिर्फ 50%शिक्षक ही उपस्थित रहेंगे। ऐसा शिक्षकों को कोरोना महामारी से बचाने और सोशल डिस्टेनसिंग के लिए किया गया है।  हमारा घर हमारा विद्यालय पर पूरा जोर। शिक्षा विभाग का अब पूरा ध्यान हमारा घर हमारा विद्यालय के क्रियान्वयन पर हो गया है। विभाग किसी भी हालत में बच्चों के लर्निग लोस्स को कम करना चाहता है। ताकि स्कूल शुरू होने पर बच्चों में पढ़ाई के प्रति उत्साह बना रहे और कम समय मे ही वे अपने सीखने के स्तर को बरकरा...

हमारा घर हमारा विद्यालय- समीक्षा के दायरे में।

मध्यप्रदेश। स्कूल शिक्षा विभाग। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बड़े-बड़े ही जोर शोर से शुरू की गई हमारा घर हमारा विद्यालय अभियान अब खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। जैसे ही अखबारों में शिक्षकों के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर सुर्खियों में आई और शिक्षक संघ द्वारा इस मामले को जोर-शोर से उठा कर मंत्री जी के समक्ष रखा गया तभी से इस अभियान के आगे बने रहने के प्रति संशय की स्थिति बनी हुई है । विदित हो कि मध्य प्रदेश के हमारा घर हमारा विद्यालय अभियान के अंतर्गत शिक्षकों को ऐसे बच्चों के घर घर जाकर अध्यापन कार्य करवाना है जहां पर टीवी , मोबाइल या रेडियो की सुविधा नहीं है।  इस कार्य के अंतर्गत उन्हें प्रतिदिन की रिपोर्टिंग तथा उनके माता-पिता से हुए वार्तालाप की जानकारी ऑनलाइन माध्यम से विभाग को प्रदान करना होती है।  इसी सिलसिले में जब से यह अभियान शुरू हुआ है तब से प्रदेश के कई जिलों से शिक्षकों की कोरोना पॉजिटिव होने की खबरें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।  शिक्षक संघ का कहना है कि प्रदेश सरकार जानबूझकर शिक्षकों को बिना किसी सुरक्षा साधन मुहैया करवाते हुए कोरोना के इस काल में स...

कब खुलेंगे स्कूल? पसोपेश में सरकार

 मध्य प्रदेश । समाचार । स्कूल शिक्षा। स्कूलों को खोलने में वक़्त लग सकता है!  कोरोना के संकट में देश ही नहीं विदेशों में भी स्कूलों में तालाबंदी की हुई है ,और यह कब तक चलेगा इसके ऊपर सभी देशों की सरकारें गहन विचार-विमर्श कर रही हैं। जबसे डब्ल्यूएचओ का बयान आया है कि कोरोना हवा में भी फैलता है तब से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है । विश्व में कोरोना की वजह से पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है एक अनुमान के मुताबिक पूरे विश्व में 70 प्रतिशत प्रारंभिक शिक्षा को 100 दिन या उससे अधिक का नुकसान हुआ है। और यह स्थिति कब तक रहेगी अनिश्चित बनी हुई है।  विश्व की सरकारों में विभिन्न जांच एजेंसियों की मदद से एक रिपोर्ट बनाई है जिसके नतीजे प्रारंभिक शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए एक अलग ही व्याख्या प्रस्तुत करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 से 18 वर्ष तक के बच्चे भी कोरोना के वाहक हो सकते हैं जिन्हें पहले कोरोना के वाहक के रूप में नहीं देखा जाता था । इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के पश्चात सरकारों को अपने शैक्षणिक संस्थान खोलने के प्रति फिर से गंभीर चिंतन करने की आवश्यकता हो गई है...

वैचारिक लेख- मेरा घर मेरा विद्यालय सच्चाई और सफलता (एक नजर में)

 मध्य प्रदेश।  स्कूल शिक्षा विभाग   जुलाई यूं तो मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग अपने अतरंगी आदेशों के कारण हमेशा से ही सुर्खियों में रहा है। यहां पर शिक्षक पढ़ाने के अलावा 40 अन्य तरह के काम भी करते हैं और अंत में हर असफलता का ठीकरा भी उन्हीं के माथे मड दिया जाता है, और बेचारा शिक्षक मेहनत करने के बाद भी उसका फल तो दूर बदले में सिर्फ और सिर्फ बदनामी ही झेलता है ।  इसके पीछे प्रारंभिक तौर पर योजनाओं के क्रियान्वयन निर्माण में शिक्षकों की सहभागिता का ना होना है ।योजनाओं को बनाया तो बड़ी ही समझदारी से जाता है,लेकिन जमीन पर क्रियान्वयन सच्चाई के धरातल पर होता है तो यह उतना परिणाम नहीं दे पाते जितना कि इनसे उम्मीद की जाती है । आखिर ऐसा क्यों कभी किसी ने इस पर विचार किया है । मेरे ख्याल से तो नहीं !!  अगर किया होता तो आज प्रदेश ही नहीं देश की शिक्षा व्यवस्था भी इतनी नीचे नहीं गिरी होती देश के विद्यालयों को, जनकल्याणकारी योजनाओं का केंद्र बना दिया गया है। मुफ्त पुस्तक, मुफ्त खाद्यान्न,मुफ्त साइकिल,मुफ्त यूनिफार्म, स्कॉलरशिप और न जाने कितनी ही योजनाएं व...

मुफ्त की रोटियों से उपजा बवाल

मध्यप्रदेश। ये कैसी पत्रकारिता- आजकल पत्रकार बनना ओर उससे भी ऊपर पत्रकारिता को नीचे गिराना बहुत आसान हो गया है। पत्रकार, अपने मूल काम से हटकर ब्लैकमेलर ज्यादा हो गए है।  बहुत से ऐसे छोटे पत्रकार है जिनकी रोजी रोटी ऐसी ही कुकृत्यों से चलती है।  मामला उठा है भोपाल के एक अखबार के लेख से। इसमे शिक्षक समुदाय को लेकर बेहद   अपमानजनक टिप्पणी की गई हैै। शिक्षकों  की मर्यादा को कलंकित  करने का प्रयास इस अखबार ने किया है, जिसके कारण पूरे शिक्षक समाज में बेहद रोष व्याप्त है।  अखबार के लेख में शिक्षकों को 3 माह से मुफ्त की रोटी तोड़ने वाला बताया है जिस पर ही ये बवाल खड़ा हुआ है।   शिक्षक समुदाय ने इस पेपर की कतरन को वायरल कर लोगों को यह बताने का प्रयास किया है कि समाज में पत्रकारिता का स्तर कितना नीचे गिर चुका है।  इन पत्रकारों को यह भी पता नहीं कि वह जो लिख रहे हैं, उसका सच्चाई से कितना लेना देना है। जब इस संबंध में शिक्षकों से बात की गई तो उन्होंने इस लेख पर कड़ा विरोध जताया । उन्होंने बताया कि लॉकडाउन में सिर्फ शिक्षक ही घर नहीं बै...

घर घर शिक्षक- शिक्षा के साथ नित् नए प्रयोग।

 शिक्षा की प्रयोगशाला-  मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के नए आदेश के अनुसार अब बच्चों का घर ही उनका स्कूल बन गया है। और इनका जिम्मा मुख्य तौर पर उनके माता-पिता तथा घर वालों को दिया गया है ।स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार अब घर के एक कक्ष को स्कूल के अनुसार वातावरण देने के लिए पालक  थालिया या घंटी बजाकर नियत समय पर अपने बच्चों को पढ़ाने  बैठाएँगे ,लेकिन जिस ज्वलंत प्रश्न का उत्तर हर कोई देने से बच रहा है  वह यह है कि अगर पालक बच्चों की पढ़ाई के लिए दिन भर घर पर रहेंगे तो फिर काम कौन करेगा ?ग्रामीण अंचलों में देखा गया है कि माता पिता सुबह से ही मजदूरी और खेती के काम में लग जाते हैं ,ऐसी स्थिति में बच्चों को पढ़ाने बिठाना यह चुनौतीपूर्ण कार्य होगा।  कुछ रिपोर्ट के अनुसार जब शिक्षक घर-घर जाकर फीडबैक ले रहे थे तो उन्होंने बताया कि शहरों में तो फिर भी घर पर कोई मिल जाता है ,लेकिन ग्रामीण अंचलों के घरों में लोग ताले लगाकर खेती करने या मजदूरी करने अपने बच्चों को साथ लेकर निकल जाते हैं। और अगर बच्चे हैं भी , तो वह आस-पड़ोस में खेल...

मध्यप्रदेश- स्कूल रहेंगे बन्द लेकिन इन्हें करना होगा काम।

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने घोषित की 31 जुलाई तक छुट्टियां  मध्य प्रदेश । संवाददाता । मध्य प्रदेश सरकार कोरोना वायरस के बढ़ते जोखिम के मद्देनजर अभी बिल्कुल भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है । लोक शिक्षण संचनालय ने कल जारी आदेश में, स्कूल शिक्षा विभाग की 30 जून तक के अवकाश को आगे बढ़ाते हुए 31 जुलाई तक करने का निर्णय किया  है । विभाग ने इसके साथ ही साफ कर दिया है कि सिर्फ स्कूल बंद रहेंगे लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई और अन्य गतिविधियां  जस की तस चलती रहेगी ।  आदेश आने के पश्चात शिक्षकों में गफलत की स्थिति निर्मित हो गई थी। वह समझ नहीं पा रहे थे कि क्या उन्हें स्कूल जाना है या नहीं। लेकिन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शिक्षकों को अभी नियमित स्कूल का संचालन तो नहीं करना है, लेकिन घर घर जाकर पुस्तक वितरण का कार्य तथा डीजी लेप  द्वारा संचालित कक्षाएं तथा उनका संचालन पूर्व की भांति ही करना होगा ।  6 जुलाई से शुरू होगी हलचल। दिनांक 6 जुलाई 2020 से पुस्तक वितरण करने के पश्चात उसकी पावती लेना , प्रतिदिन 5 विद्यार्थियों के घर जाकर "मेरा घर मेरा विद्यालय" का फॉलोअप लेना ...

मेरा घर मेरा विद्यालय- एक जरुरी सूचना

---दिनाँक 6.7.2020 से हर घर में बजेगी स्कूल की घंटी।  *घर के स्कूल में प्रातः 10 बजे पालक द्वारा घण्टी/थाली बजाकर स्कूल प्रारम्भ किया जाएगा, इसी प्रकार दोपहर एक बजे घण्टी/थाली बजाकर अवकाश किया जाएगा।*   *राज्य शिक्षा केन्द्र ने ''हमारा घर-हमारा विद्यालय'' योजना  1 से  8 तक की कक्षाओं के लिए तैयार की है। जिसमें बच्चों को घर पर ही स्कूली वातावरण में अध्यापन कराया जाएगा।*  भोपाल। मध्यप्रदेश के  सभी घरों में (क्लास 1 से 8वी में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के घरों में) स्कूल की घंटी 6 जुलाई 2020 से सुनाई देने लगेगी। बच्चे पढेंगे, योग करेंगे, लिखेंगे और कहानियॉ भी सुनेंगे और उन पर नोट्स तैयार करेंगे।  कोरोना संकट काल में विद्यार्थियों की शैक्षिक नियमितता बनाए रखने के लिए, राज्य शिक्षा केन्द्र ने ''हमारा घर-हमारा विद्यालय'' योजना तैयार की है, जिसमें बच्चों को घर पर ही स्कूली वातावरण में अध्यापन कराया जाएगा। योजना का शुभारंभ शनिवार को मंत्रालय में फेसबुक लाइव कार्यक्रम के माध्यम से प्रमुख सचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी द्वारा किया गया। ...

अब शिक्षकों को घर घर जाकर पढ़ाना होगा।

मप्र। राज्य शासन और स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा कल फेसबुक पर दिए गए एक वीडियो में विभाग ने आगामी आने वाले समय में शिक्षा तथा उसकी गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए क्या नीतियां अपनाई जाएगी,  उसके बारे में बताया। शासन 8 जुलाई से हमारा घर हमारा विद्यालय अभियान शुरू करने जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत बच्चों को घर पर ही स्कूल जैसा वातावरण मिले, ऐसा सुनिश्चित किया  जाएगा । बच्चे घर पर ही प्रतिदिन 2 से 3 घंटे पढ़ाई करेंगे, जिसकी मॉनिटरिंग पालक ,शिक्षक एवं सरकारी अमला करेगा। शिक्षक प्रतिदिन अपने वार्ड मोहल्ले या गांव में 5 अभिभावकों से बात करेंगे ,तथा उनके बच्चों की शिक्षा तथा उसमें आने वाली कठिनाइयों पर चर्चा करेंगे। क्या है  "मेरा घर मेरा विद्यालय " अभियान यह अभियान 8 जुलाई से पूरे प्रदेश में एक साथ शुरू किया जाएगा। इस अभियान के अंतर्गत बच्चे अपने घर के किसी एक कक्ष में नियत समय पर पढ़ाई करने के लिए बैठेंगे ।जिसकी शुरुआत पालक घंटी बजाकर करेंगे । ऐसा इसलिए ताकि बच्चों को विद्यालय जैसा माहौल घर पर ही मिले। यहां कक्षाएं सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक प्रतिदिन लगा...

मध्यप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा की मेरिट सूची जारी

मध्यप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा की मेरिट सूची का प्रकाशन  लम्बे समय से चली आ रही भर्ती प्रक्रिया  को आगे बढ़ाते हुए प्रशासन ने उच्च माध्यमिक और माध्यमिक शिक्षकों की मेरिट सूची का प्रकाशन कर दिया है। अब पात्र शिक्षकों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा।  विभाग नए सत्र से पहले शिक्षकों की पदस्थापना करना चाहता है। उम्मीदवारों को अपने जिले से ही mp ऑनलाइन के द्वारा चॉइस फिललिंग करनी होगी।  लम्बे समय से चल रही है भर्ती प्रक्रिया 2018 से शुरू हुई प्रक्रिया कोरोना के कारण आगे बढ़ती गई। इसी बीच मार्च से लॉक डाउन होने और सरकार बदलने के कारण भी इस प्रक्रिया को समय पर शुरू नही किया जा सका।  बार बार प्रक्रिया के आगे बढ़ने से अभ्यर्थियों में भी बैचेनी बढ़ती जा रही थी,लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे प्राथमिकता से लेते हुए फिर से शुरू किया है,जिससे अभ्यर्थियों में फिर से एक नई उम्मीद जागी है।  20 अप्रेल से शुरू होनी थी प्रक्रिया सूची के प्रकाशन से लेकर सारि जानकारी पोर्टल के अनुसार 20 अप्रैल से शुरू होनी थी ,जिसे पोर्टल पर अपडेट किया जा चुका था लेकिन बाद में हटा दिया ग...

अध्यापक से शिक्षक बनाना नही आसान।

शासन की घोषित प्रक्रिया के अनुसार संविलियन में लग सकता है 2 माह तक का वक़्त। शासन ने जो प्रारूप प्रकाशित किया है उसके अनुसार संविलियन की प्रक्रिया संकुल स्तर से शुरू होगी। जानकारों का मानना है कि अगर 16 अगस्त से भी प्रक्रिया शुरू की जाएगी तो भी इसे पूरा होने में 2 माह तक का समय लग सकता है। इससे अध्यापक परेशान है। और वेतनमान एवं सीनियरिटी के बारे में भी स्पष्ट जानकारी नही है। गजट प्रकाशन में सिर्फ संविलियन की प्रक्रिया का उल्लेख है। साथ ही जिन अध्यापको के ऊपर अनुषशानात्मक कार्यवाही चल रही है उनका संविलियन भी नही होगा।