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हमारा घर हमारा विद्यालय- समीक्षा के दायरे में।

मध्यप्रदेश। स्कूल शिक्षा विभाग।


स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बड़े-बड़े ही जोर शोर से शुरू की गई हमारा घर हमारा विद्यालय अभियान अब खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। जैसे ही अखबारों में शिक्षकों के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर सुर्खियों में आई और शिक्षक संघ द्वारा इस मामले को जोर-शोर से उठा कर मंत्री जी के समक्ष रखा गया तभी से इस अभियान के आगे बने रहने के प्रति संशय की स्थिति बनी हुई है ।

विदित हो कि मध्य प्रदेश के हमारा घर हमारा विद्यालय अभियान के अंतर्गत शिक्षकों को ऐसे बच्चों के घर घर जाकर अध्यापन कार्य करवाना है जहां पर टीवी , मोबाइल या रेडियो की सुविधा नहीं है।  इस कार्य के अंतर्गत उन्हें प्रतिदिन की रिपोर्टिंग तथा उनके माता-पिता से हुए वार्तालाप की जानकारी ऑनलाइन माध्यम से विभाग को प्रदान करना होती है।  इसी सिलसिले में जब से यह अभियान शुरू हुआ है तब से प्रदेश के कई जिलों से शिक्षकों की कोरोना पॉजिटिव होने की खबरें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।  शिक्षक संघ का कहना है कि प्रदेश सरकार जानबूझकर शिक्षकों को बिना किसी सुरक्षा साधन मुहैया करवाते हुए कोरोना के इस काल में संक्रमित होंने के लिए मजबूर कर रही है।  अगर जल्द ही इस कार्यक्रम को स्थगित नहीं किया गया तो शिक्षक संगठन इसका खुलकर विरोध करेंगे। 

क्यों आई ये नोबत!!

 रिपोर्ट के अनुसार सागर जिले में एक साथ 7 से लेकर 10 शिक्षकों के कोरोना संक्रमित होने की खबर से विभाग भी सकते में हैं। क्योंकि यहां शिक्षक घर घर जाकर बच्चों से एवं उनके परिवार जनों से मिले थे। ऐसी स्थिति में कोरोना चेन के बड़े रूप लेने की गुंजाइश बन गई है । शिक्षक संगठनों का यह भी कहना है कि घर घर जाकर प्रत्येक बच्चे पर ध्यान देने के बजाय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कुछ शर्तों के साथ विद्यालय को ही खोलना सुसंगत रहेगा । अगर इसी तरह से शिक्षक साथी कोरोना पॉजिटिव पाए जाएंगे तो यह उनके लिए तथा उनके परिवार के लिए भी घातक होगा। ज्ञात रहे शिक्षकों को कोरोना योद्धा का दर्जा भी नहीं दिया गया है। ऐसी स्थिति में अगर किसी शिक्षक की कोरोना संक्रमित होने से मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार को किसी भी प्रकार की कोई आर्थिक सहायता प्रदान नहीं की जाएगी।  साथ ही शिक्षक संगठन यह भी कह रहे हैं घर घर जाकर बच्चों को पढ़ाना एक व्यावहारिक कार्य नही  है , इससे तो कई बेहतर है की सीमित संख्या में प्रतिदिन छात्रों को स्कूल बुलाकर अध्यापन कार्य शुरू करवा दिया जाए।
 उन्होंने स्कूल शुरू करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं।

 कैसे शुरू कर सकते हैं स्कूल:-

1.  30 से 50% बच्चों को पाली में बुलाकर।

2. प्रतिदिन सिर्फ एक कक्षा के बच्चों को बुलाकर अगले दिन अगले कक्षा और इस प्रकार इस से पढ़ाई रोटेशन के द्वारा करवाई जा सकती है।

3. बड़े बच्चों को सवेरे 3 घंटे और छोटे बच्चों को 2 घंटे की विशेष कक्षाएं लगाकर भी पढ़ाया जा सकता है।

4.  प्राइमरी स्कूल को सुबह की पाली में एवं माध्यमिक स्कूल को दोपहर की पाली में लगाया जा सकता है ।इससे स्कूल में एक साथ अधिक संख्या में बच्चों की उपस्थिति नहीं रहेगी जिससे संक्रमण का खतरा कम रहेगा।

5. विद्यालय के समय को घटाकर आधा किया जाए तथा भोजन अवकाश कम कर दिया जाए।


यह कुछ तथ्य है जिन को ध्यान में रखकर आगे की रूपरेखा बनाई जा सकती हैं । एक मत यह भी है कि स्कूल का संचालन पूर्ण रूप से संस्था के ऊपर छोड़ दिया जाए वह अपने हिसाब से तय कर बच्चों की उपस्थिति एवं पढ़ाई के घंटे तय कर सकें। ताकि विद्यालय प्रबंधन अपने यहां की स्थिति के अनुसार निर्णय लेकर स्कूल का संचालन सुचारू रूप से कर सकें।

  इन सब बातों का मकसद सिर्फ यही है की बच्चों की पढ़ाई का नुकसान ज्यादा ना हो।  लेकिन इस प्रक्रिया में शिक्षकों तथा उनके परिवार के स्वास्थ्य को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विभाग को भी चाहिए कि वह इस योजना का फिर से समीक्षा करें तथा ईसे बेहतर बनाकर इस प्रकार प्रस्तुत करें जिसमें शिक्षक एवं छात्र दोनों ही ज्यादा से ज्यादा लाभ प्राप्त कर सके।

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