सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अब शिक्षकों को घर घर जाकर पढ़ाना होगा।

मप्र।
राज्य शासन और स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा कल फेसबुक पर दिए गए एक वीडियो में विभाग ने आगामी आने वाले समय में शिक्षा तथा उसकी गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए क्या नीतियां अपनाई जाएगी,  उसके बारे में बताया।


शासन 8 जुलाई से हमारा घर हमारा विद्यालय अभियान शुरू करने जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत बच्चों को घर पर ही स्कूल जैसा वातावरण मिले, ऐसा सुनिश्चित किया  जाएगा ।
बच्चे घर पर ही प्रतिदिन 2 से 3 घंटे पढ़ाई करेंगे, जिसकी मॉनिटरिंग पालक ,शिक्षक एवं सरकारी अमला करेगा।

शिक्षक प्रतिदिन अपने वार्ड मोहल्ले या गांव में 5 अभिभावकों से बात करेंगे ,तथा उनके बच्चों की शिक्षा तथा उसमें आने वाली कठिनाइयों पर चर्चा करेंगे।


क्या है  "मेरा घर मेरा विद्यालय " अभियान

यह अभियान 8 जुलाई से पूरे प्रदेश में एक साथ शुरू किया जाएगा।
इस अभियान के अंतर्गत बच्चे अपने घर के किसी एक कक्ष में नियत समय पर पढ़ाई करने के लिए बैठेंगे ।जिसकी शुरुआत पालक घंटी बजाकर करेंगे ।

ऐसा इसलिए ताकि बच्चों को विद्यालय जैसा माहौल घर पर ही मिले।

यहां कक्षाएं सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक प्रतिदिन लगाई जाएगी ।इन कक्षाओं में रेडियो कार्यक्रम ,टीवी कार्यक्रम ,एवं डीजी लैब द्वारा शिक्षण कार्य करवाया जाएगा।

 शाम 4:00 से 5:00 तक विद्यार्थी खेलकूद ,कलात्मक गतिविधियां ,एवं छोटी-छोटी गतिविधियों के द्वारा अपना मनोरंजन करेंगे ।
इन सभी क्रियाओं के अलावा इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि वह जो पढ़ रहे हैं, वह सही तरीके से सीखे और उसे अपने दैनिक जीवन में लागू करें।
 खेल खेल में शिक्षा मिले यही इस कार्यक्रम की मूल भावना है।

इसके बाद शाम को 7:00 से 8:00 के बीच वह अपने घर में माता-पिता या दादा दादी ,नाना नानी से अपनी भाषा में कोई कहानी सुनेंगे और उस कहानी का सार लिखेंगे इस क्रिया के द्वारा वह अपनी सोच और समझ विकसित कर सकेंगे।

शनिवार एवं रविवार मस्ती की पाठशाला का आयोजन किया जाएगा ,जिसमें होने वाली रोचक गतिविधियां कर पाएंगे और सीख पाएंगे।

इसके साथ ही मोबाइल व्हाट्सएप ग्रुप पर शिक्षक क्विज प्राप्त करेंगे ,जो वह आगे अपने छात्रों को पहुंचाएंगे और मोबाइल पर ही इसका उत्तर छात्र दे पाएंगे ।

इस प्रकार शिक्षक मोबाइल के द्वारा अपने छात्रों की प्रगति को देख और पढ़ पाएगे ।

 विभाग की यह योजना दिखने में और सुनने में तो काफी रोचक हैं ।अब देखना यह होगा कि वास्तविक धरातल पर यह योजना कितनी सफल हो पाती हैं।
 हर बार की तरह इस बार भी इस प्रक्रिया का संपूर्ण जिम्मेदारी जमीनी तौर पर काम करने वाले शिक्षक के ऊपर ही आई है। शिक्षक को छात्र तथा उसके परिवार से तालमेल बनाकर इस सत्र का शुभारंभ करना होगा इस अभियान के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी कुछ माह तक प्रारंभिक शिक्षा शुरू होने में समय लगेगा।तथा स्कूल शायद अभी बंद ही रहेंगे ।


आपको यह आलेख कैसा लगा नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

घर घर शिक्षक- शिक्षा के साथ नित् नए प्रयोग।

 शिक्षा की प्रयोगशाला-  मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के नए आदेश के अनुसार अब बच्चों का घर ही उनका स्कूल बन गया है। और इनका जिम्मा मुख्य तौर पर उनके माता-पिता तथा घर वालों को दिया गया है ।स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार अब घर के एक कक्ष को स्कूल के अनुसार वातावरण देने के लिए पालक  थालिया या घंटी बजाकर नियत समय पर अपने बच्चों को पढ़ाने  बैठाएँगे ,लेकिन जिस ज्वलंत प्रश्न का उत्तर हर कोई देने से बच रहा है  वह यह है कि अगर पालक बच्चों की पढ़ाई के लिए दिन भर घर पर रहेंगे तो फिर काम कौन करेगा ?ग्रामीण अंचलों में देखा गया है कि माता पिता सुबह से ही मजदूरी और खेती के काम में लग जाते हैं ,ऐसी स्थिति में बच्चों को पढ़ाने बिठाना यह चुनौतीपूर्ण कार्य होगा।  कुछ रिपोर्ट के अनुसार जब शिक्षक घर-घर जाकर फीडबैक ले रहे थे तो उन्होंने बताया कि शहरों में तो फिर भी घर पर कोई मिल जाता है ,लेकिन ग्रामीण अंचलों के घरों में लोग ताले लगाकर खेती करने या मजदूरी करने अपने बच्चों को साथ लेकर निकल जाते हैं। और अगर बच्चे हैं भी , तो वह आस-पड़ोस में खेल...

मेरा घर मेरा विद्यालय- एक जरुरी सूचना

---दिनाँक 6.7.2020 से हर घर में बजेगी स्कूल की घंटी।  *घर के स्कूल में प्रातः 10 बजे पालक द्वारा घण्टी/थाली बजाकर स्कूल प्रारम्भ किया जाएगा, इसी प्रकार दोपहर एक बजे घण्टी/थाली बजाकर अवकाश किया जाएगा।*   *राज्य शिक्षा केन्द्र ने ''हमारा घर-हमारा विद्यालय'' योजना  1 से  8 तक की कक्षाओं के लिए तैयार की है। जिसमें बच्चों को घर पर ही स्कूली वातावरण में अध्यापन कराया जाएगा।*  भोपाल। मध्यप्रदेश के  सभी घरों में (क्लास 1 से 8वी में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के घरों में) स्कूल की घंटी 6 जुलाई 2020 से सुनाई देने लगेगी। बच्चे पढेंगे, योग करेंगे, लिखेंगे और कहानियॉ भी सुनेंगे और उन पर नोट्स तैयार करेंगे।  कोरोना संकट काल में विद्यार्थियों की शैक्षिक नियमितता बनाए रखने के लिए, राज्य शिक्षा केन्द्र ने ''हमारा घर-हमारा विद्यालय'' योजना तैयार की है, जिसमें बच्चों को घर पर ही स्कूली वातावरण में अध्यापन कराया जाएगा। योजना का शुभारंभ शनिवार को मंत्रालय में फेसबुक लाइव कार्यक्रम के माध्यम से प्रमुख सचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी द्वारा किया गया। ...

मुफ्त की रोटियों से उपजा बवाल

मध्यप्रदेश। ये कैसी पत्रकारिता- आजकल पत्रकार बनना ओर उससे भी ऊपर पत्रकारिता को नीचे गिराना बहुत आसान हो गया है। पत्रकार, अपने मूल काम से हटकर ब्लैकमेलर ज्यादा हो गए है।  बहुत से ऐसे छोटे पत्रकार है जिनकी रोजी रोटी ऐसी ही कुकृत्यों से चलती है।  मामला उठा है भोपाल के एक अखबार के लेख से। इसमे शिक्षक समुदाय को लेकर बेहद   अपमानजनक टिप्पणी की गई हैै। शिक्षकों  की मर्यादा को कलंकित  करने का प्रयास इस अखबार ने किया है, जिसके कारण पूरे शिक्षक समाज में बेहद रोष व्याप्त है।  अखबार के लेख में शिक्षकों को 3 माह से मुफ्त की रोटी तोड़ने वाला बताया है जिस पर ही ये बवाल खड़ा हुआ है।   शिक्षक समुदाय ने इस पेपर की कतरन को वायरल कर लोगों को यह बताने का प्रयास किया है कि समाज में पत्रकारिता का स्तर कितना नीचे गिर चुका है।  इन पत्रकारों को यह भी पता नहीं कि वह जो लिख रहे हैं, उसका सच्चाई से कितना लेना देना है। जब इस संबंध में शिक्षकों से बात की गई तो उन्होंने इस लेख पर कड़ा विरोध जताया । उन्होंने बताया कि लॉकडाउन में सिर्फ शिक्षक ही घर नहीं बै...